पागल थे हम तुम को कहते थे अपना |
समझे थे कोई सलोनासा सपना |
न हम सह सके दर्दे दिल ऐ हसीना |
न हम कह सके दिल ऐ ख्वाइश ओ तमन्ना |
मगर एक दिन हमने हिम्मत बनाई |
मोहब्बत कि फरियाद तुमको सुनाई |
बहोत देर कि जब ये तुमने सुनाया |
अपना तो सपनाही निकला पराया |
सपना न टूटा मगर हम तो टुटे |
किसीने न लुटा मगर हम तो लुटे |
अब भी ये सपना न लगता बेगाना |
सपना तो अपना था अपना बस सपना |
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