Friday, 16 August 2013

|| गुरु वंदना ||

प्रथम वंदू आदीगुरू | चल अचलांचा उद्धारु |
भजू तयासी निरंतरू | नमस्कारु ||१||

द्वितीय ज्ञानाचा सागर | सकल सुखांचे आगर |
गुरु ज्ञानदेव ईश्वर |  | नमस्कारु ||२||

तृतीय योगियांचा राजा | विवेकानंद गुरु माझा |
त्याचिया ते चरणरजा | नमस्कारु ||३||

माम जगणे सुसह्य केले | गण गण गणात बोले |
चतुर्थी ते गजाननाले | नमस्कारु ||४||

अनंत रूपे मोजू जाता | एकवटुनी झाली माता |
पंचमी आदिशक्ती आता | नमस्कारु ||५||

विठ्ठले एकरूप झाले | सदेह वैकुंठासी गेले |
षष्ठी तुकाराम आगळे | नमस्कारु ||६|| 

रामकृष्ण परमहंस | हृदयी देवीचा निवास |
सप्तमी तो ईश्वरी अंश | नमस्कारु ||७||

शिवशंकर माझी कात | शिवशंभो बाहेर आत |
अष्टमी सांब नीळकंठ | नमस्कारु ||८||

नवमी सावरली वाट | अन धरिला माझा हात |
जाहले एक नवनाथ | नमस्कारु ||९||

तारीला शैलेंद्र बावरू | ऐसे माझे सकल गुरु |
किर्ती जयांची  दिगंतरू | नमस्कारु ||१०||

स्वीकारोनी मम प्रार्थना | वदविली गुरुवंदना |
ऐषा  श्री स्वामी समर्थांना | नमस्कारु ||११||

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