|| गुरु वंदना ||
प्रथम वंदू आदीगुरू | चल अचलांचा उद्धारु |
भजू तयासी निरंतरू | नमस्कारु ||१||
द्वितीय ज्ञानाचा सागर | सकल सुखांचे आगर |
गुरु ज्ञानदेव ईश्वर | | नमस्कारु ||२||
तृतीय योगियांचा राजा | विवेकानंद गुरु माझा |
त्याचिया ते चरणरजा | नमस्कारु ||३||
माम जगणे सुसह्य केले | गण गण गणात बोले |
चतुर्थी ते गजाननाले | नमस्कारु ||४||
अनंत रूपे मोजू जाता | एकवटुनी झाली माता |
पंचमी आदिशक्ती आता | नमस्कारु ||५||
विठ्ठले एकरूप झाले | सदेह वैकुंठासी गेले |
षष्ठी तुकाराम आगळे | नमस्कारु ||६||
रामकृष्ण परमहंस | हृदयी देवीचा निवास |
सप्तमी तो ईश्वरी अंश | नमस्कारु ||७||
शिवशंकर माझी कात | शिवशंभो बाहेर आत |
अष्टमी सांब नीळकंठ | नमस्कारु ||८||
नवमी सावरली वाट | अन धरिला माझा हात |
जाहले एक नवनाथ | नमस्कारु ||९||
तारीला शैलेंद्र बावरू | ऐसे माझे सकल गुरु |
किर्ती जयांची दिगंतरू | नमस्कारु ||१०||
स्वीकारोनी मम प्रार्थना | वदविली गुरुवंदना |
ऐषा श्री स्वामी समर्थांना | नमस्कारु ||११||
No comments:
Post a Comment