Sunday, 14 December 2014

एक राधा एक मीरा



राधा को चाहिए जी शाम
मीरा भक्ति करे निष्काम
इक चाहे शाम संग रहना  
दुजी शाम नाम मे खोना
राधा को चाहिए जी शाम ....

हर पल हरी ढुंढे अखियां
हरी कहा पुछे सब सखियाँ
श्री हरी बने राधाजी के प्राण
बिन हरी तडपत राधा जान
राधा को चाहिए जी शाम ....

मोरे संग सदा शाम रसिया
शाम रंग मोरे अंग बसिया
हरी बसे मोरे मन मोरे ध्यान
मीरा हरी बने एक रुह-जान
राधा को चाहिए जी शाम ....

हरी मिले चुन कोई डगरिया
बन राधा बन मीरा साथिया
हरी ढुंढ हर घडी हर स्थान
या हरी हरी कर गुणगान
राधा को चाहिए जी शाम ....