Friday, 16 August 2013

पगला



मैं पागल मेरा ईश्वर पागल .. पागल मेरा प्यार ||
पागल कोई नही हैं फिर भी .. पागल हैं संसार ||

पागल मां हैंबेटा पागलभाई बेहेन पागल
पागल बाप कि बेटी पागल सगे भी हैं पागल
पागलपन में सब हैं सियाने .. कहते मैं पागल
सच मैं पागल ईश्वर पागल ... पागल मेरा प्यार ||

धन दौलत के लिये हैं पागल धनावानोंकी भीड
सलाम करते झुकते रहते कहा हैं इनकी रीड
मैं ना चाहू हिरे मोती कहते मी पागल
सच मैं पागल ईश्वर पागल ... पागल मेरा प्यार ||

औरत कोई चाहे .. दुजा चाहता हैं अधिकार
कोई बना हैं साधू कोई साधू का सरदार
रहना चाहु मनुष्य तो वो कहते मैं पागल
सच मैं पागल ईश्वर पागल ... पागल मेरा प्यार ||

पंक में डुबकी मार के सुंदर बन जाते हैं वीर
दुःख के सागर गोते खाके कई बने हैं पीर
मन को राखू साफ तो फिर भी कहते मैं पागल
सच मैं पागल ईश्वर पागल ... पागल मेरा प्यार ||



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