Wednesday, 29 January 2014

देवदास



मी जाईन तेंव्हा .... करशील  .... काय तू?
मी जाईन तेंव्हा .... क्षण लागशील .. का स्मरू?

बरसाती भिजुनी चिंब
ओघळतील थेंब अन थेंब
फुटतील धारा का मनी
मी जाईन तेंव्हा .... झरतील का  .. अश्रू?

मी जाईन तेंव्हा .... करशील  .... काय तू?
मी जाईन तेंव्हा .... क्षण लागशील .. का स्मरू?

श्वासातून धुमसत वारा
अंगारा फुलवी निखारा
पेटतील ज्वाला का मनी 
मी जाईन तेंव्हा .... बिजली लागे का .. कोसळू?

मी जाईन तेंव्हा .... करशील  .... काय तू?
मी जाईन तेंव्हा .... क्षण लागशील .. का स्मरू?



Friday, 10 January 2014

गीता गान

किशन कहे अर्जुन से       सुन ले देकर ध्यान
गीता नाम की सरिता       इसमे ग्यान महान

सगे संबंधी सारे            तेरी आंख के तारे
डाल के जो बैठे हैं          तेरे मन में डेरे
प्यार तुझे हैं जिनका        मोल न कुछ भी इनका
कल भूलेंगे तुझको          तू तो हैं इक तिनका
तेरे बोल हो मीठे           संग तेरे हैं आते
सत्य कटू तू बोले          बरसायेंगे लाते
कोई नही जब तेरा ....      क्युं अटकी हैं जान
गीता नाम की सरिता       इसमे ग्यान महान

खाली हाथ तू आया         बंद मुठ्ठी में माया
यही छोड जायेगा           जो भी तुने कमाया
सुख संपती हैं चंचल        इसके पीछे मत चल
तेरा अपना क्या हैं         अभी हैं हाथ में जो पल
क्या तेरा क्या मेरा         सब में मेरा बसेरा
जिस पल खोली आंखे       वही शुरू हैं सवेरा
बंद आंख कि दुनिया में ....  क्युं अटकी हैं जान
गीता नाम की सरिता       इसमे ग्यान महान

जो भी तू करता हैं         जैसा तू बोता हैं
आज नही तो कल में       फल वैसा पाता हैं
तेरेही कर्मो का            तुझे कहा हैं ग्यान
कोई नही जब जाने        सही गलत पहचान
फल की आशा में जो       बने कर्म का मुखडा
झोली खोल के देखे         रोयेगा वो दुखडा
कर्म के फल में तेरी ....     क्युं अटकी हैं जान
गीता नाम की सरिता       इसमे ग्यान महान

ना तू हैं कुछ करता        कुछ ना तेरे हाथ
जो मेरे मन आया          वही बने दिन रात
मुझसे शुरू हुवा हैं          सृष्टी का निर्माण
कण कण में बसता हैं      मेरा अंश ये जान
जीवन जीनेवाला           हर जीव नही हैं दुजा
नश्वर में मै ईश्वर          नीत कर इसकी पूजा
शरीर मिटेगा इक पल ....   क्युं अटकी हैं जान
गीता नाम की सरिता       इसमे ग्यान महान