किशन
कहे अर्जुन से सुन ले देकर ध्यान
गीता
नाम की सरिता इसमे ग्यान महान
सगे
संबंधी सारे तेरी आंख के तारे
डाल
के जो बैठे हैं तेरे मन में डेरे
प्यार
तुझे हैं जिनका मोल न कुछ भी इनका
कल
भूलेंगे तुझको तू तो हैं इक तिनका
तेरे
बोल हो मीठे संग तेरे हैं आते
सत्य
कटू तू बोले बरसायेंगे लाते
कोई
नही जब तेरा .... क्युं अटकी हैं जान
गीता
नाम की सरिता इसमे ग्यान महान
खाली हाथ तू आया बंद मुठ्ठी में माया
यही छोड जायेगा जो भी तुने कमाया
सुख संपती हैं चंचल
इसके पीछे मत चल
तेरा अपना क्या हैं
अभी हैं हाथ में जो पल
क्या तेरा क्या मेरा
सब में मेरा बसेरा
जिस पल खोली आंखे वही शुरू हैं सवेरा
बंद आंख कि दुनिया में .... क्युं
अटकी हैं जान
गीता
नाम की सरिता इसमे ग्यान महान
जो भी तू करता हैं जैसा तू बोता हैं
आज नही तो कल में फल वैसा पाता हैं
तेरेही कर्मो का तुझे कहा हैं ग्यान
कोई नही जब जाने सही गलत पहचान
फल की आशा में जो बने कर्म का मुखडा
झोली खोल के देखे रोयेगा वो दुखडा
कर्म के फल में तेरी .... क्युं
अटकी हैं जान
गीता
नाम की सरिता इसमे ग्यान महान
ना तू हैं कुछ करता
कुछ ना तेरे हाथ
जो मेरे मन आया वही बने दिन रात
मुझसे शुरू हुवा हैं
सृष्टी का निर्माण
कण कण में बसता हैं
मेरा अंश ये जान
जीवन जीनेवाला हर जीव नही हैं दुजा
नश्वर में मै ईश्वर
नीत कर इसकी पूजा
शरीर मिटेगा इक पल .... क्युं
अटकी हैं जान
गीता
नाम की सरिता इसमे ग्यान महान