Sunday, 14 December 2014

एक राधा एक मीरा



राधा को चाहिए जी शाम
मीरा भक्ति करे निष्काम
इक चाहे शाम संग रहना  
दुजी शाम नाम मे खोना
राधा को चाहिए जी शाम ....

हर पल हरी ढुंढे अखियां
हरी कहा पुछे सब सखियाँ
श्री हरी बने राधाजी के प्राण
बिन हरी तडपत राधा जान
राधा को चाहिए जी शाम ....

मोरे संग सदा शाम रसिया
शाम रंग मोरे अंग बसिया
हरी बसे मोरे मन मोरे ध्यान
मीरा हरी बने एक रुह-जान
राधा को चाहिए जी शाम ....

हरी मिले चुन कोई डगरिया
बन राधा बन मीरा साथिया
हरी ढुंढ हर घडी हर स्थान
या हरी हरी कर गुणगान
राधा को चाहिए जी शाम ....




Friday, 14 November 2014

बालदिनाच्या शुभेच्छा ..!




साई सुट्टयो      छापा काटा
तुझ्यावरती        डाव आता

लपंडाव अन       चोर पोलीस
कधी रंगे            डब्बा ऐसपैस

खांब खांब          खांबोली
चला फोडू           लगोरी

काचापाणी          खेळ मांडू
चला खेळू           विटी दांडू

तळ्यात मळ्यात दगड का माती
सागरगोटे           उडू लागती

कधी मारू          दोरीच्या उड्या
झिम्मा बसफुगडी आट्यापाट्या

सापशिडी            व्यापार डाव
जुने दिवस           आठवू राव
जुने दिवस           आठवू राव




Tuesday, 14 October 2014

WE ARE VENTURIAN

Today for 20th Ventura Day ... Hearty wishes

कहता हू आज तुम्हे दिल की ये बात
युं ही नही जुडा यहा अपना ये साथ
ध्यान दे इधर जरा खोल तेरे कान
कौन है यहा पे सुन सुन मेरी जान
अरे VENTURIAN ….. अरे VENTURIAN ... अरे VENTURIAN

हिंदी है ना पंजाबी ना कोई गुजराथी
मारवाडी ना सिंधी नही कोई मर्राठी
कन्नडी ना तेलगु ना कोई तम्मिळि
बेंगाली ना असामी ना कोई मल्याळी
सारे VENTURIAN …. सारे VENTURIAN
We are VENTURIAN … We all VENTURIAN

कोई भी हो भाषा यहा कोई भी प्रदेश
कोई भी हो धर्म-जाती कोई भी हो भेस
Ventura के छत के नीचे सारे हुए एक
Ventura के intention ... सबसे है नेक
सारे VENTURIAN …. बोलो VENTURIAN
We are VENTURIAN … We all VENTURIAN

Investment का रास्ता अंधेरे मे खोया
दुनिया मे क्यू के भैया सबसे बडा रुपैया
हम है तेल बाती ... जले Ventura का दिया
Investment के रास्ते मे उजाला कर दिया

India के वासी सारे हम है Indian
We are proud to be VENTURIAN
सारे VENTURIAN …. बोलो VENTURIAN
We are VENTURIAN … We all VENTURIAN



Wednesday, 1 October 2014

प्रवासी




मोदसागरी डुंबत बसले
तीन घडीचे तीन प्रवासी
तिघेही म्हणती मीच अगस्ती
पिऊनि सागरा लुटूया मस्ती
सागर मंथन करुया म्हणती
भरुन घेऊ ओंजळमोती
तीन घडीचे तीन प्रवासी
एकामागे एक चालती
या मागे तो त्या मागे हा
कोण पहिला कोण शेवटी







Saturday, 20 September 2014

अब तो छुडा लो प्राण



जब तक "मैं" था "मैं" ही "मैं" 
"मैं" मुझमे सिमट गया ||

"मैं" तुझमे खो गया तो
मुझसे "मैं" क्यू रूठ गया ||

तुम मेरे श्रीराम हो स्वामी
मैं तुम्हरा हनुमान ||

हे स्वामी दिल चीर दो मेरा
तुम हो विराजमान ||

जलबिन मछली इस संसार के
जाल में अटकी जान ||

अंत ना देखो अब तो छुडा लो
कंठ में अटके प्राण ||



Sunday, 14 September 2014

घायाळ




प्रत्येकाला वाटत असतं ...
आपलं कुणी असावं
आयुष्याच्या वाटचालीत ...
कुणी आपल्याला पुसावं
नजर थकते शोधताना ...
आपलं कुणी दिसत नाही
प्रत्येक जण घायाळ इथे ...
कुणी कुणा पुसत नाही
आपलं कुणी असण्यासाठी ...
सोबत त्यांच्या जावं लागतं
सारी दुनिया महान मानून ... 
लहान त्यांच्यात व्हावं लागतं






Sunday, 7 September 2014

रंगोनी श्रीरंगी



जैसे न असणे
तैसे भासविणे ||
                    जैसे न दिसणे
                    तैसे दाखविणे ||

ते बोल बोलणे
जैसे न बोलणे ||
                    ते बोल ऐकणे
                    जे न ऐकविणे ||

कर्ता कर्म करता
कर्म न करणे ||
                    स्वीकारोनी कर्म
                    कर्म नाकारणे ||

नाम जपे नामी
ना "मी" जपे नामी ||
                    ना जपे "मी" नामी
                    नाम जपविणे ||

सखा रंगे रंगी
रंगोनी न रंगी ||
                    सखा रंगे रंगी
                    रंगोनी श्रीरंगी ||


  

Thursday, 4 September 2014

विठ्ठल



आम्हा वैष्णवांची …. नित्य दिपवाळी
विठूनामे विठ्ठला  …. नित्य मी ओवाळी
विठू ज्योत विठू पंचप्राण

मुखे नाम हरी …. हाती वाजे टाळी
मृदुंगाची साथ …. नाचते चिपळी
मनी ध्यानी विठूचे निधान



Monday, 25 August 2014

|| श्री स्वामी समर्थ ||


नृसिंहाचे    रूप   प्रगटे    कर्दळीवनी |
निर्गुणाचे गुण स्वामी सगुण निर्गुणी ||

अजन्मा    जन्मा    येई    या    जनामनी |
जन्मोजन्मीच्या जन्मा जगावे या जन्मी ||

अरुपाचे   रूप   स्वामीरूपे   प्रसावोनी |
विरूपाच्या रूपा केले अरूप स्वरूपिणी ||



Wednesday, 16 July 2014

राधा


मोहे क्यू दरसायो शाम ?
मोरा बिगड गयो हर काम

धून मुरली की .... भई मै बावरी
कान्हा ढुण्डत  …. सूद बुद बिसरी
दिखे ____ हर घडी हर पल शाम
मोरा बिगड गयो हर काम

नाही दिखे मोहे .... पनघट सखिया
शाम रंग से ..... भर गई अखिया
दिखे ____ जल स्थल मे घनशाम
मोरा बिगड गयो हर काम

किस पग घर है ..... किस पग नदिया
चितचोरन दिख .... भुली डगरिया
दिखे ____ हर क्षण हर कण शाम
मोरा बिगड गयो हर काम




Monday, 14 April 2014

|| श्री स्वामी समर्थ ||

महाविष्णू तू महादेव तू 
तू ब्रम्हा तू श्री स्वामी ||
वंदन करिती भक्त सकल तव 
कृपा वर्षवी हे स्वामी ||

तू जगदंबा तूची भवानी
तू काली तू श्रीलक्ष्मी ||
माय माउली तूची आमुची 
कृपा वर्षवी हे स्वामी ||

तू कर्ता अन तूच करविता 
तू त्राता मज सांभाळी  ||
लीन होवुनी तुला विनवितो
कृपा वर्षवी हे स्वामी ||

अनादी तू अन अनंत तरीही
आदि अंत तू या जीवनी ||
सखा म्हणे हर जन्मी तुझा मी 
कृपा वर्षवी हे स्वामी  ||


Monday, 17 March 2014

आत्मप्रकाश



मोकळे आकाश आकाश
भरला प्रकाश प्रकाश

वर आभाळाच्या भाळी
विणली प्रकाशाची जाळी

त्यात अडकले मन
झाले उन्मन उन्मन

ऐशा उन्मनी जीवनी
चाले संसार संसार

पाश संसाराचा दाट
होई अंधार घनदाट

भेदी अंधाराच्या भिंती
आत्मप्रकाश प्रकाश

ऐसा तो आत्मप्रकाशी
विरे मोकळ्या आकाशी

सखा म्हणे माझे मन
मोकळे जरी अडकून 


आस

सांग तुला लागली कशाची आस
सख्या असा होऊ नको तू उदास

मनाचा खोटेपणा मोठा न्यारा
मांडून बसतो संसार सारा
मिरवीत बसतो आपुला तोरा
जागेपणी धरी स्वप्नांची कास
सख्या असा …

नात्याचा गोता किती सांगू मोठा
जोडीत बसतो फाट्याला फाटा
गुंतवळा जैशा सागरी लाटा
कर्दमी शोध तू कमळाचा वास
सख्या असा …





Sunday, 16 February 2014

वाटचाल एक साथ ५० वर्षे



मधामधे भिजल्या शब्दा ... जिव्हेवर ठेवू
तुझ्या सुरामध्ये माझ्या ... स्वरांना नहावू
आज पुन्हा आठवूनी ... गीत जुने गाऊ

झुंज वादळाशी घेत ... तुझी माझी साथ
झेलेले ते सारे घाव ... गुंफुनीया हात
एक क्षणा विसरुनी सारे ... मिसळूनिया जाऊ
आज पुन्हा आठवूनी ... गीत जुने गाऊ

वाट चालताना ... किती पुढे आलो
जीवनरथ धावताना ... चाके दोन झालो
एक साथ दोन्ही डोळे ... आरशात पाहू
आज पुन्हा आठवूनी ... गीत जुने गाऊ

मनी लहर झंकारली या ... जरी तू अबोल
नव्याची नव्हाळी नाही ... तरी अनमोल
पापणीत चांदण्यांचा ... दिवा पुन्हा तेवू
आज पुन्हा आठवूनी ... गीत जुने गाऊ




Sunday, 2 February 2014

नवा डाव नवा खेळ

पुन्हा एक नवे वर्ष
पुन्हा एक नवी वेळ
पुन्हा सुरु करा चला
नवा डाव नवा खेळ

सवयीचा गुलाम म्हणतो 
जुने दळण पुन्हा दळा 
घडाळ्याच्या काट्यावरती
पुन्हा एकदा पळा पळा 

सकारात्मक स्वीकार करा
गुलामाचे विचार टाळा
जुने जीर्ण सोडा आता
नव्याकडे सारे वळा

विचारांची भरवा शाळा
विचारांचा फुलवा मळा 
विचारांच्या मेळ्यांमध्ये
विचारांचे पीठ मळा

दिव्यामध्ये पुन्हा तेल 
भरून नवी वात जाळा 
काळोखाच्या आक्रोशातून
प्रकाशाचे गाणे उजळा 

प्रकाशाच्या नाना तऱ्हा
कोवळे ऊन मध्यान्ही झळा
जीवनाच्या अंगी पहा 
नाना रंग नाना कळा

जीवनाच्या रेसमध्ये
जोर लावून पुन्हा पळा
ध्येय पुन्हा गाठण्यासाठी
धीर धरा सोसा कळा

पुन्हा सुरु करा चला
नवा डाव नवा खेळ
पुन्हा एक नवे वर्ष
पुन्हा एक नवी वेळ



Wednesday, 29 January 2014

देवदास



मी जाईन तेंव्हा .... करशील  .... काय तू?
मी जाईन तेंव्हा .... क्षण लागशील .. का स्मरू?

बरसाती भिजुनी चिंब
ओघळतील थेंब अन थेंब
फुटतील धारा का मनी
मी जाईन तेंव्हा .... झरतील का  .. अश्रू?

मी जाईन तेंव्हा .... करशील  .... काय तू?
मी जाईन तेंव्हा .... क्षण लागशील .. का स्मरू?

श्वासातून धुमसत वारा
अंगारा फुलवी निखारा
पेटतील ज्वाला का मनी 
मी जाईन तेंव्हा .... बिजली लागे का .. कोसळू?

मी जाईन तेंव्हा .... करशील  .... काय तू?
मी जाईन तेंव्हा .... क्षण लागशील .. का स्मरू?



Friday, 10 January 2014

गीता गान

किशन कहे अर्जुन से       सुन ले देकर ध्यान
गीता नाम की सरिता       इसमे ग्यान महान

सगे संबंधी सारे            तेरी आंख के तारे
डाल के जो बैठे हैं          तेरे मन में डेरे
प्यार तुझे हैं जिनका        मोल न कुछ भी इनका
कल भूलेंगे तुझको          तू तो हैं इक तिनका
तेरे बोल हो मीठे           संग तेरे हैं आते
सत्य कटू तू बोले          बरसायेंगे लाते
कोई नही जब तेरा ....      क्युं अटकी हैं जान
गीता नाम की सरिता       इसमे ग्यान महान

खाली हाथ तू आया         बंद मुठ्ठी में माया
यही छोड जायेगा           जो भी तुने कमाया
सुख संपती हैं चंचल        इसके पीछे मत चल
तेरा अपना क्या हैं         अभी हैं हाथ में जो पल
क्या तेरा क्या मेरा         सब में मेरा बसेरा
जिस पल खोली आंखे       वही शुरू हैं सवेरा
बंद आंख कि दुनिया में ....  क्युं अटकी हैं जान
गीता नाम की सरिता       इसमे ग्यान महान

जो भी तू करता हैं         जैसा तू बोता हैं
आज नही तो कल में       फल वैसा पाता हैं
तेरेही कर्मो का            तुझे कहा हैं ग्यान
कोई नही जब जाने        सही गलत पहचान
फल की आशा में जो       बने कर्म का मुखडा
झोली खोल के देखे         रोयेगा वो दुखडा
कर्म के फल में तेरी ....     क्युं अटकी हैं जान
गीता नाम की सरिता       इसमे ग्यान महान

ना तू हैं कुछ करता        कुछ ना तेरे हाथ
जो मेरे मन आया          वही बने दिन रात
मुझसे शुरू हुवा हैं          सृष्टी का निर्माण
कण कण में बसता हैं      मेरा अंश ये जान
जीवन जीनेवाला           हर जीव नही हैं दुजा
नश्वर में मै ईश्वर          नीत कर इसकी पूजा
शरीर मिटेगा इक पल ....   क्युं अटकी हैं जान
गीता नाम की सरिता       इसमे ग्यान महान