Saturday, 20 September 2014

अब तो छुडा लो प्राण



जब तक "मैं" था "मैं" ही "मैं" 
"मैं" मुझमे सिमट गया ||

"मैं" तुझमे खो गया तो
मुझसे "मैं" क्यू रूठ गया ||

तुम मेरे श्रीराम हो स्वामी
मैं तुम्हरा हनुमान ||

हे स्वामी दिल चीर दो मेरा
तुम हो विराजमान ||

जलबिन मछली इस संसार के
जाल में अटकी जान ||

अंत ना देखो अब तो छुडा लो
कंठ में अटके प्राण ||



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