मोहे क्यू दरसायो शाम ?
मोरा बिगड गयो हर काम
धून मुरली की .... भई मै बावरी
कान्हा ढुण्डत …. सूद
बुद बिसरी
दिखे ____ हर घडी हर पल शाम
मोरा बिगड गयो हर काम
नाही दिखे मोहे .... पनघट सखिया
शाम रंग से ..... भर गई अखिया
दिखे ____ जल स्थल मे घनशाम
मोरा बिगड गयो हर काम
किस पग घर है ..... किस पग नदिया
चितचोरन दिख .... भुली डगरिया
दिखे ____ हर क्षण हर कण शाम
मोरा बिगड गयो हर काम
No comments:
Post a Comment