Tuesday, 17 November 2020

अरमान

तेरे दरस का प्यासा मैं तो रह गया
यही अरमान लेके मैं तो चल दिया

गिरनार तेरे द्वार 
न आ पाऊंगा इस बार
तेरी मिट्टी चूमने से मैं तो रह गया
तेरे दरस का प्यासा मैं तो रह गया

हिमालय तुने पुकारा
पर मैंने ही नकारा 
सुना फिर भी अनसुना ही मैं तो रह गया
तेरे दरस का प्यासा मैं तो रह गया

कर्दळी के बन की भाषा
सिखने की थी अभिलाषा 
न किया प्रयास, गुंगा मैं तो रह गया
तेरे दरस का प्यासा मैं तो रह गया

दक्षिणेश्वरी है काली
मेरी मैंया मतवाली
तेरी गोद मे आनेसे मैं तो रह गया
तेरे दरस का प्यासा मैं तो रह गया


नोव्हेंबर १७, २०२०

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