कितनी बार
कितनी बार ... देखा तुझे
छुप छुप के ...
पलकों के साये से ...
तुझे देखने उठी नजर
तू देखे कही और
मै तेरी ओर ...
नजर छुपा के
तेरी नजर से ...
डूब जाऊ गहराईयों में
आंखो के जरीये
तह ए झील तक
और करु बसेरा
मेरे दिल का
तेरे दिल में
कितनी बार
कितनी बार ... चाहा तुझे
पूंछू तेरी खबर ...
कुछ सुनाऊ मेरी ...
बात करने उठी नजर
तू देखे इधर
मैं कही और ...
नजर चुरा के
तेरी नजर से ...
कही उतर न जाये तू
आंखो के जरीये
मेरे दिल तक
और देखे तु तूझे
मेरे दिल के
आईने में
*शैलेन्द्र*
१८ जून, २०२०
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