Friday, 19 June 2020

बरसात

जानता हू मै ... मेरे बुलाने पर
तूही तो आयी है ... बरसात बनकर

गाल को चूमके गयी .. पहिली ही बूंद
... तेरे आने का संकेत देकर
फिर आयी मिट्टी की खुशबू ...
तेरे मदहोश साथ का एहसास लेकर

बूंद बूंदसे ... धीमे धीमेसे...मेरा सारा शरीर छूकर ..
तूही तो आयी है... बरसात बनकर


बूंदोकी लडी और लडियोंकी बौछार
धीरेसे बना तुफान ... तेरा बरसना
हर अंग को छेडकर ... सरसराते हुवे
तेरा आवेश मे आकर मुझमें समा जाना

नस नस को भीगोकर ...आवेग से लिपटकर ...
तूही तो आयी है ... बरसात बनकर


भिगते भिगते ... तेरे घने आलिंगनमे
फैलाये जो हाथ ... कसकर तुझको लिपटाने
मैने मुझे ही पाया ... मेरेही आगोश में
देखके ये बचपना तू हस दी ... बूंदोके टपटपाने में

अचानकसी चली गयी .. मीठे पलों का बीज बोकर
तूही तो आयी थी ... बरसात बनकर

जानता हू मै ... मेरे बुलाने पर
तूही तो आयी थी ... बरसात बनकर


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