Thursday, 21 July 2016

आदिशक्ति


हे मनोहरिणी,  शांतस्वरुपिणी,
त्रिकालभ्रमणी, सुहास्य वदने,
वर दे .. वर दे .. वर दे
कालीरुपी त्वम् .. शिर तव चरणम्
भव भय हरणम् .. हिमवती शरणम्
वंदे .. वंदे .. वंदे

कोटी कोटी शंख ... गरजत गगन निनादे
लक्ष लक्ष पद्म ... पदी पदी कमल विराजे
तप्त रुद्र नेत्र ... ज्वल ज्वल अग्नी लोचनी
मृत्यू रूप चक्षु ... परि तू मंद मंद मृगनयनी
कालीरुपी त्वम्  .. शिर तव चरणम्
भव भय हरणम् .. हिमवती शरणम्
वंदे .. वंदे .. वंदे
हे मनोहरिणी,  शांतस्वरुपिणी,
त्रिकालभ्रमणी, सुहास्य वदने,
वर दे .. वर दे .. वर दे

रक्तबीज शोषण ... असुर निखंदिनी
प्रचंड चंड मुंड ... खड्गे खंड खंडिनी      
शुंभ निशुंभ अशुभा ... पग पग मद निर्दालिनी
महिमहिषासुर मर्दना ... आदिशक्ति शूलधारिणी
कालीरुपी त्वम्  .. शिर तव चरणम्
भव भय हरणम् .. हिमवती शरणम् ...
वंदे .. वंदे .. वंदे
हे मनोहरिणी,  शांतस्वरुपिणी,
त्रिकालभ्रमणी, सुहास्य वदने,
वर दे .. वर दे .. वर दे
कालीरुपी त्वम्  .. शिर तव चरणम्
भव भय हरणम् .. हिमवती शरणम् ...
वंदे .. वंदे .. वंदे


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