मेरे दर्द पर वह इतनी फिदा हो गई ।
मुझे दर्द मे डुबाना उसकी अदा बन गई ।
कुछ करू ना करू ........ एकही है असर ।
सांस मे भी लगे है ...... भंवर का बसर ।
तेरा होना न होना ....... बन गया बेअसर ।
सहारा ए दर्द अब ........ तसव्वुर बन गई ।
मेरे दर्द पर वह इतनी फिदा हो गई ।
मुझे दर्द मे डुबाना उसकी अदा बन गई ।
तू जो रूठे तो हो .... रास्ते धुंदले ।
तू जो टूटे तो खो ..... जाती है मंजिले ।
मिश्र मे डूब के ... बढ गयी मुश्किले ।
हश्र मे हर दवा .... अब जहर बन गई ।
मेरे दर्द पर वह इतनी फिदा हो गई ।
मुझे दर्द मे डुबाना उसकी अदा बन गई ।
शैलेंद्र शिरोळकर
भवर = तुफान, वावटळ
बसर = मुक्कामाचे ठिकाण
तसव्वुर = काल्पनिक, कल्पना, स्वप्न, वास्तवात नसलेले
मिश्र = शराब
हश्र = अंजाम
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