Saturday, 24 October 2015

किस्मत


       
मेरे दर्द पर वह इतनी फिदा हो गई ।
मुझे दर्द मे डुबाना उसकी अदा बन गई ।
                       
कुछ करू ना करू ........ एकही है असर ।
सांस मे भी लगे है ...... भंवर का बसर ।
तेरा होना न होना ....... बन गया बेअसर ।
सहारा ए दर्द अब ........ तसव्वुर बन गई ।

मेरे दर्द पर वह इतनी फिदा हो गई ।
मुझे दर्द मे डुबाना उसकी अदा बन गई ।

तू जो रूठे तो हो .... रास्ते धुंदले ।
तू जो टूटे तो खो ..... जाती है मंजिले ।
मिश्र मे डूब के ... बढ गयी मुश्किले ।
हश्र मे हर दवा ....  अब जहर बन गई ।

मेरे दर्द पर वह इतनी फिदा हो गई ।
मुझे दर्द मे डुबाना उसकी अदा बन गई ।

शैलेंद्र शिरोळकर

भवर = तुफान, वावटळ
बसर = मुक्कामाचे ठिकाण
तसव्वुर =  काल्पनिक,  कल्पना, स्वप्न,  वास्तवात नसलेले
मिश्र = शराब
हश्र = अंजाम


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