Saturday, 1 August 2015

गुजारीश



हर आहट पे थर्राता ..
.. लहराता है .. दिल का झील 
मिलन की आस क्यों .. परेशान ?
....... घुल चुके है दिल

किस धडकन पर ....
किस धडकन पर .... दे दस्तक ?
ये धडकन .... न 
तेरी न मेरी
मेरी पलकों मे तेरी आखें है
मेरी पलकों मे तेरी आखें है
या धोका है .... नजरों का मेरी ?

मेरा मिलना .... तेरी सासों से
मेरा मिलना .... तेरी सासों से

और तेरा मिलके .... परे रहना
शिद्दत से बरसना 
तेरा ....
तो कभी बाष्प बन जाना

ये डोर लब्जो की है
या घेरा डाले .... भावना ?
सफर .... हमसफर बिन 
.... या दायरा .... आशिकाना



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