Saturday, 16 March 2019

आखरी लम्हा



एक लम्हा .. फिर खुशी का
ठहरता नही .. हाथ लगता नही
करना चाहू ... कैद ये पल
फिसलता ही है ... हाथ लगता नही
अब तूही ठहर जा
मेरा जीवन संवार जा
या तो होने दे ये आखरी लम्हा

क्यूं होता है ये पल
क्यूं खोता है ये पल
याद आता है क्यूं कल
आज होता नही है कभी भी ... फिर से कल
आसमां की ... रंग ए दिलकश
बिखरती ही है ... हाथ लगती नही
पानी पानी ... लहर झूमी
ये थमती नही ... हाथ लगती नही
अब तूही ठहर जा
मेरा जीवन संवार जा
या तो होने दे ये आखरी लम्हा
एक लम्हा .. फिर खुशी का
ठहरता नही .. हाथ लगता नही
करना चाहू ... कैद ये पल
फिसलता ही है ... हाथ लगता नही

क्यूं बने मैं और तू
क्यूं अलग मैं से तू
मैं कुछ वक्त ही क्यूं तू
"मैं" खोता नही है कभी भी ... बन के तू
जैसे मिश्री ... बनती पानी
घुल जाती है ... हाथ लगती नही
जैसे खुशबू ... हर एक नस में
समां जाती है ... हाथ लगती नही
अब तूही ठहर जा
मेरा जीवन संवार जा
या तो होने दे ये आखरी लम्हा
एक लम्हा .. फिर खुशी का
ठहरता नही .. हाथ लगता नही
करना चाहू ... कैद ये पल
फिसलता ही है ... हाथ लगता नही

एक लम्हा .. फिर खुशी का
ठहरता नही .. हाथ लगता नही
एक लम्हा ..
एक लम्हा ..
एक लम्हा ..

१३-०३-२०१९

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