तेरे
कदमो की आहट
देती
दिल को हैं राहत
कोई
हैं आसपास
कोई
हैं खास खास
ना
दिखना तेरा
शिकायत
ना हैं
दिल
को समझाया ये
शरारत
सी हैं
मन
की झंकार ने मगर
मजबूर
कर दिया
मचले
अरमान
कदमो
को बहका दिया
तेरी
गलियोमे ढुंढा
दरस
ना मिले
बस
इसी गम से हम
मय
में डुबे चले
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