Monday, 9 January 2017

ओ रामजी

रामभक्त हू, मै भी, भले ही ... नही हू मै हनुमान
दो दिन का है काम मुझे, तुम मिलवा दो ना राम

कई दिनोंका  भूका हू मै, निकल रही है जान
तुकडा रोटी मिले तो मेरा बन जायेगा काम
रामभक्त हू, मै भी, भले ही ...

रोटी मिली तो, कल की चिंता मे अटके है प्राण
जेब है खाली, भरवा दो जी जेबमे थोडे दाम
रामभक्त हू, मै भी, भले ही ...

पैसे से क्या होता, सर पर खुला हुवा आसमान
घर मिल जाये, सुकून से फिर लेंगे राम का नाम
रामभक्त हू, मै भी, भले ही ...

छोटा सा घर, क्या है काम का, बंगला दे दो जी
खाली बंगला रूखा रूखा, सामने हो गाडी
रामभक्त हू, मै भी, भले ही ...

ये सब मेरा, अंश भी इसका ना कोई मांगे
दुःखी हू सोच के अब बच्चोंका क्या होगा आगे
रामभक्त हू, मै भी, भले ही ...

दुगना तिगना कर दो रामजी, रख कर मेरा मान
नही चाहिये जादा कुछ बस, छोटासा वरदान
दो दिन का है काम मुझे, तुम मिलवा दो ना राम
बाद मे रख लो राम तुम्हे जब, बन जाये मेरा काम

रामभक्त हू, मै भी, भले ही ...नही हू मै हनुमान
दो दिन का है काम मुझे, तुम मिलवा दो ना राम


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