Saturday, 22 October 2016

नमी आखें


खलती नही है तेरी कमी
फिर क्यूँ है आखें नमी ... नमी

क्या है इशारा .... ये कैसे मै जानू
मन मे तूही तू है .... मै क्यूँ ये मानू
अब ना मै करता हूँ .... दिल की गुलामी
फिर क्यूँ है आखें नमी ... नमी

दिलका वो हिस्सा.... मैनै है छाना
रोका है यादो में .... तेरा उभरना
वो सब किया जो लगा लाजमी
फिर क्यूँ है आखें नमी ... नमी



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